#Exam
एग्जाम और इंटरव्यू जैसी चीज़ों की टेंशन हर बन्दे को होती है, हमको भी होती है और तुमको भी हो रही होगी। क्या कहा, "नहीं हो रही।" ठीक है, ठीक है, मान लिया कि आप बच्चे नहीं है, बड़े हो गए हैं। लेकिन हम जानते हैं कि हो रही है। दरअसल जहाँ पहले ही पता हो कि कोई जज करने ही बैठा है वहां टेंशन होना स्वाभाविक ही है। ये बोर्ड के एग्जाम्स में जो जज किये जाने की टेंशन है ना वो सिर्फ पहली बार है, इसलिए अजीब लग रही है। जिन्दगी में कई बार ऐसी ही टेंशन फिर से होगी।
10th में होगी, 12th में होगी, फिर competitive exams में होगी, कॉलेज में एडमिशन लेने के वक्त होगी, नौकरी पाने के लिए इंटरव्यू के वक़्त होगी और एक दिन फिर जब शादी के लिए अपना पार्टनर चुन रहे होंगे ना तो जिस लड़की या लड़के से मिलने जा रहे होंगे, वहां सेलेक्ट होंगे या रिजेक्ट ये सोच सोच के उस दिन भी होगी।
अब जिंदगी में भाग जाने का कोई स्कोप तो होता नहीं है। आज नहीं तो कल वो डरावनी सी चीज़ दोबारा सामने आएगी। जिस चीज़ से भागेंगे वो तो बार बार हर मोड़ पर सामने आएगी ही।
ऐसी चीजों में से सबसे आसान एग्जामस के डर से निपटना होता है। बहुत सिंपल है, जो ढेर सी सलाह, कभी डायरेक्ट कभी इनडायरेक्ट आपको दी गयीं थी, उन्हें याद करना पड़ता है बस।
छः पॉइंट बता रहा हूँ, ताकि आंसरशीट में आप कुछ ढंग का लिख सको।
1. एग्जाम होते ही हैं ये आपको बचपन से ही पता है। तो जैसे हर बार टाइम टेबल होता है, वैसा ही टाइम टेबल अपने लिए भी रखिये। फिक्स्ड टाइम टेबल के बिना अचिवेमेंट नहीं मिलती। जैसे किसी के ट्यूशन के समय फिक्स टाइम पर वहां खड़े रहते हो, कितने बजे कोई किस गली से गुज़रता है वो जानकर आप भी अपना सारा काम छोड़कर वहीं रोज खड़े होते हो। यही होता है टाइमटेबल।
शुरुआत में कुछ दिन रूटीन फॉलो करने में दिक्कत होती है, थोड़े दिन में प्रैक्टिस हो जाएगी। ज्यादा से ज्यादा हफ्ता भर। तो एक टाइम टेबल बनाओ पढ़ने के लिए और उस पर कायम रहो।
2. रिवाइज़, रिवाइज़, रिवाइज़! ये दोहराने को तीन बार रिवाइज़ क्यों लिखा है हमने? क्योंकि आप जो पढ़ते हैं उसे अगर रिवाइज़ नहीं करेंगे तो अगले दिन उसका 18% ही याद रहेगा। एक बार रिवाइज़ करेंगे तो करीब 50% याद होगा। दोबारा रिवाइज़ करने पर करीब 72% से 80% के बीच। तीसरे रिविज़न में वो 95% से ऊपर याद रहता है। अपने खुद के अनुभव से ये आपको पहले ही पता है, ऐसा होता है। आप बस ध्यान देना भूल गए थे। हाँ, कितने परसेंट याद रहेगा वो साइंटिफिक रिकार्ड्स होते हैं वो हम आपसे ज्यादा जानते हैं, क्योंकि हम आपसे बड़े हैं।
3. लिख के प्रैक्टिस करना सीखने का, याद करने का बेहतर तरीका होता है। अब आप पूछेंगे क्यों? तो प्यारो, एक तो लिखने के लिए तीन बार पढ़ना पड़ता है तो रिविजन अपने आप हो जाता है। दूसरा कि आपको एग्जाम लिख के देना होगा मतलब तीन घंटे के पेपर में ही सारा कुछ लिखना है। अगर आपकी लिखने की अच्छी खासी प्रैक्टिस नहीं है तो एग्जाम में क्वेश्चन छूट जायेंगे। नोट्स अपने खुद के बनाये हुए हों तो समझ में भी आसानी से आते हैं। ये भी पहले से पता है आपको, दोबारा याद दिला दिया है बस।
5. जब और पढ़ने का मन ना करे तो थोड़ी देर के लिए (दुबारा बोलते हैं, केवल थोड़ी देर के लिए।) एन्टरटेनमेंट में कोई बहुत हर्ज़ नहीं है। लेकिन इन्टरटेनमेंट का मतलब टीवी, इंस्टाग्राम, फेसबुक, और यूट्यूब नहीं होता है। घर से बाहर निकलिए, खुली हवा में जाईये, दोस्तों से मिलिए केवल। टीवी और इंटरनेट आपके पास हमेशा होगा लेकिन दोस्त नहीं। स्कूल ख़त्म होते ही सारे दोस्त अलग अलग जगहों पे होंगे, उनसे मिल नहीं पाएंगे आप हर रोज़ की तरह। मनोरंजन के लिए इंटरनेट / टीवी से बेटर आप्शन है दोस्तों से मिलना।
6. पूरी पूरी रात जाग के और दिन में सो के किसी को टॉपर बनते देखा है क्या? आपके क्लास के टॉपर पूरी पूरी रात जबरदस्ती जाग के पढाई करते हैं क्या? नींद जरुरी होती है प्यारो, अगर पता न हो तो हमसे पूछो। लगातार जागने और बेवक्त सोने से आपका रूटीन भी बिगड़ेगा और सेहत भी। दिमाग जो ख़राब होगा वो अलग। तो 24 घंटों में कम से कम 6 घंटे तो भरपूर सोइयेगा, 7 घंटे तो बहुत खूब, बस इससे ज्यादा नहीं।
और अगर ऊपर लिखा हुआ इतना पढ़कर भी आपको ये नहीं पता चला कि चौथा पॉइंट मैंने लिखा ही नहीं है तो कसम इंस्टाग्राम रील्स की, आप ध्यान से पढ़ना भूल गए है। इसे चौथा पॉइंट समझें। जो भी पढ़ें ध्यान से पढ़ें, फेसबुक की पोस्ट समझ कर न पढ़ें। ध्यान रखें इस एक महीने की पढाई का परिणाम आपके भविष्य को निर्धारित करेगा।
और आखिर में बता दें कि डर सभी को लगता है। पापा–मम्मी, अंकल-आंटी सबके सब अपने नए स्मार्ट फ़ोन की सेटिंग आपको करने के लिए क्यों थमा देते हैं? क्योंकि उनको खुद करने में डर लगता है, कुछ बिगड़ ना जाये, इसलिए आपको थमाते हैं ना? तो एग्जाम्स का डर लग भी रहा हो तो कोई बहुत ज्यादा फ़िक्र करने की बात नहीं। जो पच्चीस-पच्चीस साल के घोड़े हो गए ना उन्हें भी इंटरव्यू फेस करने में डर लगता है। हम लोगों को भी लगता है। डर तुमको पहली बार चाय बनाने में भी लगा होगा, डर सबको लगता है। तुमको भी लगता है, मुझको भी लगता है, और तुम्हारे पेरेंट्स को भी लगता है कि कहीं तुम्हारे ग्रेड्स कम न रह जाएँ।
बादबाकी, गब्बर सिंह कहे थे कि, "जो डर गया सो मर गया।" तो कुछ सोच के ही कहे थे वो।
सारी परीक्षाओं में आपका नसीब बुलंद हो। मेरा शुभाशीष आपके साथ रहेगा।