दिन-सोमवार, तारीख-याद नहीं, स्थान-कक्षा 10 का एक सेक्शन।
क्लास में पढ़ाते-पढ़ाते हम अचानक से विद्यार्थियों के बीच चहलकदमी करने लगे और एक बालिका की सीट के सामने ठिठक कर खड़े हो गए और बोले-
"छोटी बहन से लड़ना जरूरी था क्या कल तुम्हारा?"
"नहीं तो सर, नहीं लड़ी थी।"
"झूठ मत बोलो, टीवी के रिमोट को लेकर झगड़ा नहीं हुआ तुम्हारा उससे?"
"सॉरी सर, हुआ था।"
"अरे बिटिया तुम उससे बड़ी हो, तो उसके लिए सैक्रिफाइस तो कर सकती थीं न? .......कर सकती थीं न?"
"जी सर।"
"गुड़, आगे से ध्यान रखना। सिट डाउन।"
"थैंक यू सर। लेकिन आपको कैसे पता लगा सर? मैंने तो अपनी फ्रेंड्स के साथ भी ये मैटर अभी शेयर नहीं किया।"
"बिटिया हम बड़े है न और थोड़े अनुभवी भी।"
"नहीं सर, प्लीज़ बताइये न, ये बात तो मेरे और मेरी बहन के अलावा किसी को नहीं मालूम, इवन मम्मी और डैडी को भी नहीं।"
"अरे बता तो दिया कि हम अनुभवी है।"
"मेरी बहन भी नहीं बता सकती क्योंकि वो दूसरे स्कूल में है और आपका फ़ोन नम्बर भी घर पर नहीं है। सर प्लीज् बताइये न। मुझे बहुत सस्पेन्स सा फील हो रहा है।"
"बाद में बता देंगे।"
"सर प्लीज़ अभी बताइये न!"
"बताते हैं।"
और हमने कहना शुरू किया-
"देखो आपके सीधे हाथ पर कुछ खरोंचों के निशान हैं और इतने साल के अनुभव के आधार पर हम नाखून से लगी खरोंच और दूसरी चीजों से लगी खरोंच में अंतर बहुत आसानी से पता लगा लेते हैं (स्कूल में अक्सर बच्चों के झगड़े में यही खरोंचे दिखतीं है)। हाथ पर लगी खरोंच से हमें ये पता चला कि छीना झपटी हुयी है। अगर और कोई वजह होती तो खरोंच चेहरे पर भी एक दो होती। इसी वजह से हमने ये अंदाज़ लगाया कि ये खरोंच किसी अपने द्वारा दी गयी हैं। खरोंच चूँकि नाखून की हैं और नाखून लड़कियों के बड़े होते हैं इसलिए ये भी सोचना बहुत आसान था कि छीनने वाली लड़की थी। लड़की तुमसे छोटी थी ये बात से पता लगा कि चीज़ तुम्हारे हाथ में थी अगर वो बड़ी होती तो खरोंच उसके हाथ में होती क्योंकि वो बचाव कर रही होती। सिंपल।"
"वाह सर! वाह! लेकिन रिमोट का कैसे पता लगा?"
"अरे कल रविवार था न, मतलब बच्चों का टीवी देखने का दिन और फोन या कम्प्यूटर पर गेम खेलने का दिन। अगर बात कम्प्यूटर पर गेम खेलने की होती तो झगड़ा न होता क्योंकि वहां टाइम शेयरिंग हो सकती है। फ़ोन अगर होता तो वो पर्सनल होता तो झगड़ा होने के चान्स बहुत कम थे और अगर मम्मी या पापा का होता तो आपके हाथ में आने के चांस भी कम थे। अब बची टीवी, तो न तो उसमें टाइम शेयरिंग हो सकती है और न आप दूसरों की पसंद का प्रोग्राम देख सकते हो। इसलिए टीवी ही आप दोनों के लिए आसानी से रविवार वाले दिन झगडे का कारण बन सकती है। बादबाकी हम भी झगड़े है टीवी की वजह से। बस यही सब था।"
"अच्छा सर, अगर आपके अंदाजे गलत होते तो?"
"तो क्या! कुछ नहीं, नया अनुभव मिलता हमको। हम तो सीखने और सिखाने के लिए ही पैदा हुए हैं न।"
"सर मुझे नहीं मालूम था कि एक दो खरोंचों से भी कोई जीनियस इतना कुछ मालूम कर सकता है। लेकिन इतना सब आपने मुझे देखकर केवल 7 या 8 सेकण्ड्स में कैसे डिडक्ट कर लिया?"
"बहुत आसान था क्योंकि मेँ भी सुनील हूँ।
No comments:
Post a Comment