Wednesday, 18 May 2016

‪#‎ट्रिंग‬-ट्रिंग आखिरी ( कॉल फिर से)
"अरे! वो बैटरी डिस्चार्ज हो गयी थी। चार्जर में फ़ोन लगाकर बात कर पा रही हूँ।"
"कोई बात नहीं, हो जाता है कभी कभी ऐसा। आप कुछ बताने वालीं थी हमको?"
"हाँ, वो बात कुछ ऐसी है कि..... कैसे बताऊँ?"
"बोलकर और उचित शब्दों का प्रयोग करके। लेकिन जल्दी।"
"यार, मेरे 'ये' अब मुझ पर बिलकुल ध्यान नहीं देते न ज्यादा बात करते, घर आते हैं, खाना खाकर बस अपने फोन से लग जाते हैं।"
"अरे यार, तुम भी न, बस रहने दो! कोई जॉब बगैरह की टेंशन होगी उनको या कुछ नया प्लान कर रहे होंगे।"
"अरे नहीं यार! पहले पूरी बात तो सुन लो..., पहले इनका मोबाइल सब के लिए ओपन रहता था। लेकिन पिछले 2 महीनों से इनके मोबाइल में थ्री लेवल की सिक्यूरिटी लगी हुयी है। और, कोई भी इनका मोबाइल अब आजकल टच भी कर ले तो गुनाह सा हो जाता है। गर्म हो जाते है तुरंत ही।"
"अच्छा, फिर तो तुम्हारे इन पर किसी हसीं चुढ़ेल का साया है।"
"यही मुझे लग रहा है। कोई मरदूद मेरे परिवार में सेंध लगा रही है। मिल जाए तो खून पी जाउंगी उसका।"
"रहने दो तुम पर न हो पायेगा।"
"अरे ऐसे कैसे न हो पायेगा? चीर दूँगी उसको। कसम से, एक बार मिले तो सही।"
"चीर देना और फाड़ भी देना, जो मर्जी हो वो कर लेना... लेकिन मुझको क्या करना है ये तो बताओ?"
"अरे! मुझे बताओ कि उससे कैसे छुटकारा पाऊँ? उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में डाका डालने की!"
"मैं बताऊँ..? अरे मैं कैसे बता सकता हूँ? मुझे तो इस केस की एबीसीडी तक न मालूम।"
"मत बताओ। तुम बदल गए हो। बहुत बदल गए हो।"
"हौ! कभी कहती हो बिलकुल नहीं बदले और कभी कहती हो कि बदल गए हो। अगर सच बोले हम तो, हम आज भी वैसे ही हैं। बदलीं तुम हो। खैर जाने दो।समाधान बताऊँ?"
"हाँ, और क्या?"
"मतलब के लिए ब्लाक को भी अनब्लॉक करना पड़ता है। कहावत बदल दी है हमने।"
"क्या?"
"बाद में समझना इसको, खैर समाधान है.... सुनो! अगर आप प्रेमिका हो, पत्नी हो या कुछ और भी हो... या प्रेमी हो, पति हो और आपके रहते आपके साथी कहीं और बिजी हैं तो हार आपकी है। गलती उनकी नहीं गलती आपकी है। सुनो बीच में न बोलो... आपने कभी ध्यान दिया उन पर; जबसे बेटा बढ़ा हुआ है? कहाँ गयी आपकी वो अदाएं, वो बेफिक्री जिससे आपने हम जैसे पत्थरदिल को पिघला दिया था। शायद आप माँ बनने के बाद अपनी सामर्थ्य को भूल चुकी हो। अरे सुनो पहले... समाधान ही बता रहे हैं। अपने रूपरंग के जादू को जीवित करो। रात में जागो। थोड़ी अदा थोड़े नखरे दिखाओ... भूल चुकी होंगी लेकिन याद करना और अप्लाई करना। एक नेट क्लॉथ गाउन और ले लो। बस समाधान हाज़िर है। अपने घर की बातें मत करना, अपने उनके घर की बातें करना, भविष्य की बात न करना बस वर्तमान की बातें करना। इंशाअल्लाह सब सही हो जाएगा। आपकी हार धीरे-धीरे जीत में बदल जायेगी।"
"क्या ये तरीका काम करेगा?"
"ये तो आप अप्लाई कर के बताएंगी।"
"ठीक है, में हारी नहीं हूँ। करती हूँ ये फार्मूला अप्लाई।"
"करो!"
"एक प्रश्न और आपसे?" क्या आज भी मुझसे उतना ही प्यार करते हो?"
"जबाब में इतना कहूँगा कि मरना है लेकिन आत्महत्या नहीं करूँगा और किसी बिमारी से नहीं मरूँगा और तुमसे पहले नहीं मरूँगा। क्यों? इसका जबाब तुमको पता है।"
"जो कहते हो वो करते हो, इसलिए न?"
"नहीं, जो करता हूँ वो कहकर करता हूँ इसलिए। अब शुभरात्रि। दो बार कॉल कर दी हिसाब बराबर। अगर स्थिति काबू न रहे तो (वैसे तो ऐसा होगा नहीं) दुबारा कॉल करना। शुभरात्रि।"
"शुभरात्रि! कितनी खुशनसीब है वो, काश में भी हो पाती!"
"अगले जन्म में!" टूँ टूँ टूँ.........

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