Wednesday, 18 May 2016

"अरे भैया, आगरा जाना है!"
"तो जाओ भाई, मुझे क्यों बता रहे हो? ऐसे हर किसी को बताते जाओगे तो पहुंचने में देर हो जायेगी।"
"अरे नहीं भाई, बस ये बताओ कि क्या ये सड़क आगरा जाती है?"
"भाई 20 साल से तो मैं देख रहा हूँ, सड़क तो यहीं हैं । ये कहीं नहीं जाती।"
"भाईसाहब, मुझे आगरा जाना है।"
"तो जाओ मेरे भाई, मुझसे क्यों परमिशन मांग रहे हो?"
"यार अजीब आदमी है तू।"
"अजीब की तो पता नहीं लेकिन आदमी हूँ ये पता है।"
"तू जा, किसी और से पूछता हूँ।"
"आप पूछ रहे थे, मैंने सोचा बता रहे थे। क्या पुछा था?"
"आगरा जाना है, कैसे जाएँ?"
"आगे से राईट बस स्टैंड है, बस पकड़ लो पहुँच जाओगे आगरा।"
"तू पिटाई मांग रहा है, यार गाड़ी है हमारे पास।?"
"भाई बस से जाओगे तो गाड़ी यहीं खड़ी करनी पड़ेगी।"
"अरे गाड़ी से जाना है। बस रास्ता बता तू।"
"किसका?"
"आगरा जाने का। मेरे बाप।"
"भाई तो अब सही प्रश्न पूछे हो, पहले ही पूछ लेते?"
"तो अब बता दे मेरे भाई।"
"भाई मेरी पीठ पर क्या है?"
"बैग।"
"में खुद अलीगढ का रास्ता पूछ रहा हूँ।"
"ये शहर कोनसा है?"
"भाई, हाथरस है।"
"चलबे इमरान, गूगल मैप चालू कर!"
"भाई, अलीगढ़ का रास्ता भी बता देना, मेरा इंटरनेट पैक रोमिंग में खर्च हो गया है। भाई, भाई ...... रुक तो।"

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