Friday, 23 September 2016

#स्मार्टटॉक। (Missing Sunil Bhai Multani)

कभी हँस भी लिया करो।😊

परीक्षाओं का मौसम चल रहा है। कहने को तो इस मौसम को सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव छात्रों पर पड़ता है लेकिन एक टीचर के हिसाब से बताऊँ तो भैया अंदर की बात तो ये है कि इस मौसम में एक टीचर भी बहुत परेशान रहता है। पहले तो तीन घंटे की ड्यूटी में बोर होता हुआ और उसके बाद दुनिया का सबसे दुरूह कार्य, उत्तर-पुस्तिकाओं को जांचना, करते हुए बेचारा इतना परेशान हो जाता है क़ि अगर कोई उससे पूछे क़ि कितने बजे हैं तो जबाब में उसके मुँह से निकलता है कि 'तीन नम्बर बजे हैं।'
ऐसे ही आज हम नितांत अकेले बैठे हुये उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे थे तो हमारे एक साथी गौतमजी भी हमारे पास आकर बैठ गए। कुछ देर पश्चात् देखा तो पाया कि हमारे एकाकीपन को दूर करने चार महिला शिक्षिकाएं (हिंदी विभाग की) भी आकर बैठ गईं और फिर जो पंचायत शुरू हुई तो हम मूल्यांकन कार्य भूल चुके थे। तभी एक नयी मैडम जो कि इसी जुलाई से आयीं हैं बोलीं, "कि इस विद्यायल में आकर मेरे चश्मा और लग गया है।"
हमको तो बस सिरा मिल गया था, तुरंत हमारी कैंची तुल्य जबान हिली, "अभी क्या है मैडम? अभी तो सुनने वाली मशीन, नकली दाँत, और विग भी लगेगा और यदि ज्यादा कमजोर पड़ गयी तो वेंटिलेटर भी लग सकता है।"
"सर ऐसा क्यों कह रहे हो?" वो थोड़े गुस्सा से में बोलीं।
"मैडमजी, प्राइवेट विद्यालय में प्राइवेट टीचिंग है।" हम भी बोले।
"कह तो सही रहे हो सर, क्योंकि इसी महीने से ज्यादा देर तक खड़े रहने से पीठ में लगातार दर्द और रहने लगा है।"
"चला जायेगा।"
"कैसे?"
"पीठ पर सिल (रसोईघर में प्रयुक्त होने वाला एक पत्थर जिसका वजन 8 किलो से ज्यादा होता है) बाँध कर पढ़ाया करो।"
"अच्छा! आप और ऐसी सलाहें देकर मुझे मरवा दो।" मैडम ने हँसकर कहा।
"वास्तव में मैडमजी, मैं गलत नहीं कह रहा। इस युक्ति से आपकी पीठ में दर्द नहीं रहेगा।"
"तो फिर।"
"दर्द पीठ से हटकर कमर में आ जायेगा लेकिन पीठ दर्द चला जायेगा।"
वहाँ मौजूद सभी व्यक्ति हँसने लगे हुए थे, सब हमारे मज़ाकपसन्द रवैये से परिचित तो थे ही। तभी गौतमजी बोले, "अरे कहाँ इनकी बातों में आ रही हो मैडम। सुबह उठकर योगा किया करो, आराम मिलेगा।"
"अच्छा सर! सुबह उठकर अगर योगा किया तो घर का काम कौन करेगा?"
जबाब मैंने दिया। "घर का काम करते-करते ही योगा हो जाये तो!"
मैडम ने पूछा, "कैसे?"
(अब हमने जो युक्तियाँ बतायीं तो आपसे अनुरोध है कि उनको घर पर प्रयोग में न लाइएगा।)
"देखो, सुबह उठकर गर्म चाय पीतीं होंगी न? तो चाय के कप के ऊपर अनुलोम-विलोम करो। इससे चाय भी ठंडी होगी और योगा भी। कपालभाति अगर करो तो लेटकर करो और पेट पर दही का बर्तन रख लो। इससे रायता भी बन जायेगा और योगा भी। भुजंगासन करने से पहले कपडे गीले कर लो। इससे आसान भी हो जायेगा और पोंछा भी लग जायेगा। और बताऊँ?"
सबका हँसते-हँसते बुरा हाल था और अचानक मैडम को हँसते-हँसते खाँसी आ गयी। और कोई फिर हमसे पूछ बैठा कि, "खाँसी का भी इलाज बता दो।"
हमारी कैंची फिर चली, "बहुत आसान है, हर एक घंटे बाद तीन बड़ी चम्मच Conc. सल्फ्यूरिक एसिड पीजिये चार घंटों में चार बार। चार घंटों में ही तुरंत चली जायेगी।"
मैडम ने पूछा, "क्या? खांसी?"
मैंने कहा, "न! आपकी जान।"

अब कमरे का माहौल बिल्कुल ही बदल गया था, पूरे कमरे में केवल ठहाके थे और आस-पास के कमरों से भी कई साथी अध्यापक देखने आये थे कि आखिर हो क्या रहा है।

हँसी-ठिठोली ज्यादा हो गयी थी, प्राइवेट टीचर की जिंदगी में इतनी हँसी कहाँ? ऐसा सोचकर हम दुबारा एक कमरे में नितांत अकेले बैठ कर मूल्यांकन कार्य में ऊबने की पराकाष्ठा तक पहुँच चुके थे।

पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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