#ट्रिक 3
किस्सा तो खैर पुराना है आपने सुन रखा होगा लेकिन दुबारा सुनने में भी कोई हर्ज नहीं है।
एक बहुत ही धनी व्यक्ति ने अपनी बेहद खूबसूरत बिटिया की शादी के लिए अख़बार में एक विज्ञापन दिया और शर्त रखी कि स्वयंवर होगा और जो उस स्वयंवर का विजेता होगा वो ही उसकी बिटिया का जीवनसाथी बनने का हक़ रखेगा। बहादुर और चतुर व्यक्ति अमुक तारीख को उसके बँगले पर हाजिर हों।
अमुक तारीख आयी और धनी व्यक्ति के बँगले के बाहर दुनिया के तमाम बहादुर और चतुर नौजवानों का जमावड़ा लग चुका था। तमाम बहादुर वहाँ अपनी किस्मत को आजमाने पहुँच चुके थे। कोई अपनी BMW पर आया कोई अपनी लाइसेंसी पिस्टल लेकर आया, लेकिन सब रईसजादों के बीच एक साधारण सा लड़का भी आया था।
खैर जब सब लोग वहां एकत्र हो चुके थे तो धनी व्यक्ति ने कहा, "जनाबे हाज़रीन, आप सब लोग यहाँ मेरी बिटिया से शादी करने के लिए आये हैं, आपको देखकर बहुत ख़ुशी हुई। अब स्वयंबर की शर्त ये है कि जो मेरे इस स्विमिंगपूल को सबसे पहले पार करेगा वो ही मेरी बेटी के जीवनसाथी बनने का असली हक़दार बनेगा।"
ऐसा सुनते ही सारे नौजवानों ने अपनी शर्ट उतारी और जैसे ही वो स्विमिंग पूल में छलांग लगाने को हुए तो अचानक एक हेलीकॉप्टर के आने की आवाज गूँजी और हेलीकॉप्टर बिल्कुल स्विमिंग पूल के ऊपर था। फिर यकायक हेलीकॉप्टर से जिन्दा मगरमच्छ स्वीमिंगपूल में गिराए गए, जब सारे मगरमच्छ स्वीमिंगपूल में आ चुके थे तो हेलीकॉप्टर वहाँ से दफा हो चुका था और हर नौजवान की शर्ट वापस उसके शरीर पर आ चुकी थी मतलब अब कोई भी उस पूल में जाने को तैयार न था।
लड़की के बाप यानि धनी व्यक्ति को बड़ा अचरज हुआ और उसने उन सब बहादुरों के लिए एक घोषणा की , "जो भी सबसे पहले इस पूल को पार करेगा वो उसकी बिटिया के साथ उसके व्यापार का भी साझी बनेगा और उसके लिए एक बंगला और एक गाड़ी भी मिलेगी।"
इतना सुनकर सब सोच विचार कर रहे थे कि अचानक एक छपाक की आवाज आई और जैसे ही सबने आवाज की दिशा में देखा तो पाया कि वही साधारण सा नौजवान असीम तेजी से पूल में तैर रहा है और दो मिनट में ही उसने सारे मगरमच्छों को धता बताकर पूल पार कर लिया और शर्त के मुताबिक उस धनी व्यक्ति का दामाद बना और उसके व्यापार में साझी भी।
आप अगर सोच रहे हों कि मैंने आपको किसी हौसलामंद इंसान की कहानी सुनाई है तो आप गलत हैं। क्यों? जवाब नीचे है।
शादी के बाद जब उस साधारण इंसान से उसकी पत्नी ने पूछा कि पूल में कूदते समय क्या तुमको मगरमच्छों से डर नहीं लगा तो जवाब में उस साधारण इंसान ने बहुत ही दिलचस्प और हैरतअंगेज बात बताई कि वो खुद नहीं कूदा उसे किसी ने धक्का दिया था। वो तो बस अपनी जान बचाने को तेजी से किनारे की तरफ आना चाह रहा था और आया भी।
तो जनाब जैसे कि हम आपको पहले भी बता चुके हैं हर कहानी में कुछ न कुछ सकारात्मक ढूंढना हमारा फर्ज है तो इस कहानी से आप ये सीख सकते हैं कि बिना धक्के खाये आप तरक्की नहीं कर सकते। जितने ज्यादा धक्के उतनी ज्यादा तरक्की आपको मिलेगी बशर्ते आप थोड़ा इंतज़ार करें और धक्के सहें।
कभी कभी शिक्षक की डाँट को भी एक धक्का समझ कर आगे बढ़ना चाहिए।
बादबाकी बड़े बूढे कह गए हैं कि दुधारू गाय की लात भी सहनी पड़ती है तो सही कह कर गए हैं।
किस्सा तो खैर पुराना है आपने सुन रखा होगा लेकिन दुबारा सुनने में भी कोई हर्ज नहीं है।
एक बहुत ही धनी व्यक्ति ने अपनी बेहद खूबसूरत बिटिया की शादी के लिए अख़बार में एक विज्ञापन दिया और शर्त रखी कि स्वयंवर होगा और जो उस स्वयंवर का विजेता होगा वो ही उसकी बिटिया का जीवनसाथी बनने का हक़ रखेगा। बहादुर और चतुर व्यक्ति अमुक तारीख को उसके बँगले पर हाजिर हों।
अमुक तारीख आयी और धनी व्यक्ति के बँगले के बाहर दुनिया के तमाम बहादुर और चतुर नौजवानों का जमावड़ा लग चुका था। तमाम बहादुर वहाँ अपनी किस्मत को आजमाने पहुँच चुके थे। कोई अपनी BMW पर आया कोई अपनी लाइसेंसी पिस्टल लेकर आया, लेकिन सब रईसजादों के बीच एक साधारण सा लड़का भी आया था।
खैर जब सब लोग वहां एकत्र हो चुके थे तो धनी व्यक्ति ने कहा, "जनाबे हाज़रीन, आप सब लोग यहाँ मेरी बिटिया से शादी करने के लिए आये हैं, आपको देखकर बहुत ख़ुशी हुई। अब स्वयंबर की शर्त ये है कि जो मेरे इस स्विमिंगपूल को सबसे पहले पार करेगा वो ही मेरी बेटी के जीवनसाथी बनने का असली हक़दार बनेगा।"
ऐसा सुनते ही सारे नौजवानों ने अपनी शर्ट उतारी और जैसे ही वो स्विमिंग पूल में छलांग लगाने को हुए तो अचानक एक हेलीकॉप्टर के आने की आवाज गूँजी और हेलीकॉप्टर बिल्कुल स्विमिंग पूल के ऊपर था। फिर यकायक हेलीकॉप्टर से जिन्दा मगरमच्छ स्वीमिंगपूल में गिराए गए, जब सारे मगरमच्छ स्वीमिंगपूल में आ चुके थे तो हेलीकॉप्टर वहाँ से दफा हो चुका था और हर नौजवान की शर्ट वापस उसके शरीर पर आ चुकी थी मतलब अब कोई भी उस पूल में जाने को तैयार न था।
लड़की के बाप यानि धनी व्यक्ति को बड़ा अचरज हुआ और उसने उन सब बहादुरों के लिए एक घोषणा की , "जो भी सबसे पहले इस पूल को पार करेगा वो उसकी बिटिया के साथ उसके व्यापार का भी साझी बनेगा और उसके लिए एक बंगला और एक गाड़ी भी मिलेगी।"
इतना सुनकर सब सोच विचार कर रहे थे कि अचानक एक छपाक की आवाज आई और जैसे ही सबने आवाज की दिशा में देखा तो पाया कि वही साधारण सा नौजवान असीम तेजी से पूल में तैर रहा है और दो मिनट में ही उसने सारे मगरमच्छों को धता बताकर पूल पार कर लिया और शर्त के मुताबिक उस धनी व्यक्ति का दामाद बना और उसके व्यापार में साझी भी।
आप अगर सोच रहे हों कि मैंने आपको किसी हौसलामंद इंसान की कहानी सुनाई है तो आप गलत हैं। क्यों? जवाब नीचे है।
शादी के बाद जब उस साधारण इंसान से उसकी पत्नी ने पूछा कि पूल में कूदते समय क्या तुमको मगरमच्छों से डर नहीं लगा तो जवाब में उस साधारण इंसान ने बहुत ही दिलचस्प और हैरतअंगेज बात बताई कि वो खुद नहीं कूदा उसे किसी ने धक्का दिया था। वो तो बस अपनी जान बचाने को तेजी से किनारे की तरफ आना चाह रहा था और आया भी।
तो जनाब जैसे कि हम आपको पहले भी बता चुके हैं हर कहानी में कुछ न कुछ सकारात्मक ढूंढना हमारा फर्ज है तो इस कहानी से आप ये सीख सकते हैं कि बिना धक्के खाये आप तरक्की नहीं कर सकते। जितने ज्यादा धक्के उतनी ज्यादा तरक्की आपको मिलेगी बशर्ते आप थोड़ा इंतज़ार करें और धक्के सहें।
कभी कभी शिक्षक की डाँट को भी एक धक्का समझ कर आगे बढ़ना चाहिए।
बादबाकी बड़े बूढे कह गए हैं कि दुधारू गाय की लात भी सहनी पड़ती है तो सही कह कर गए हैं।
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