#स्मार्टनेस।
तेज रफ़्तार चलती हुई बस अचानक एक जगह ब्रेकों की चीत्कार सी करती हुई रुकी और बस के अगले गेट से एक बुजुर्गवार के साथ एक कतली बेचने वाले ने भी एक टोकरी भर कतली लेकर बस में प्रवेश किया और जोर-जोर से आवाज लगाने लगा....."20 रूपये की दो कतली, 20 रूपये की दो कतली, बेहद मीठी, यहाँ की मशहूर...मेवाओं से भरपूर...केवल 20 रूपये की दो कतली।"
तभी पिछले गेट से दूसरे कतली वाले ने प्रवेश किया और अपनी आदतानुसार चिल्लाया-- "20 रूपये की दो कतली...20 रूपये की दो कतली...।"
पहले वाले ने उसे तुरंत टोका और कहा, "जब अभी तेरे मेरे बीच में फैसला हुआ है कि एक बस तेरी और एक बस मेरी तो तू इस बस में क्यों आया है? उस हिसाब से तो ये बस मेरी है, यहाँ से उतर और मुझे बेचने दे।"
"वो फैसला रद्द। इसलिए हर बस मेरी और हर बस तेरी। तू बेच और मैं भी बेचूंगा।" दूसरे वाले ने बिना किसी दबाब के अपनी बात कही।
"फैसला अपनी जगह है, सबके सामने हुआ है इसलिए तुझे तो बेचने ही नहीं दूंगा।" इतना कहकर पहले कतली वाले ने आवाज लगाना शुरू किया..."पंद्रह रूपये की दो कतली, पंद्रह रूपये की दो कतली।"
दूसरे वाले ने भी उसकी देखा देखी आवाज लगायी "10 रूपये की दो कतली, दस रुपये की दो कतली..."
बस में बैठी सवारियाँ इस लड़ाई का लुत्फ़ उठाने लगीं।
तभी पहले वाले ने कहा, "भले ही आज कितना भी नुकसान हो जाये, तुझे नहीं बेचने दूँगा।" इतना कहकर उसने आवाज लगायी "आठ रूपये की दो कतली, आठ रूपये की दो कतली.."
दूसरे वाले ने भी कहा, "बेटा, मैं भी नुकसान झेल लूँगा पर तेरा नुकसान करा कर मानूँगा।" इतना कहकर वो चिल्लाने लगा ..."पाँच रूपये की दो कतली, पाँच रूपये की दो कतली।"
बस में बैठी सवारियों के पर्स खुलने लगे और पहले वाला दूसरे को गालियाँ देते हुए बस से उतर गया।
आप अगर सोच रहे हो कि मैं आपको बिजनेस में कॉम्पटीशन से होने वाले नुकसान के बारे में सिखाने के लिए कोई कहानी सुना रहा हूँ तो आप गलत सोच रहे हैं। आगे पढ़िए और खुद जांचिए।
तभी कतली खाकर चुके एक लड़के ने अपने साथ बैठे बुजुर्ग से कहा, "बाबूजी आपने क्यों नहीं खरीदी? उन दोनों की लड़ाई में सबका फायदा हो गया।"
बुजुर्ग ने जवाब दिया, "मियाँ वो दोनों कतली बेचने वाले सगे भाई हैं और ये उनके कतली बेचने का अलग तरीका है। जो कतली तुमने पाँच रूपये की दो खरीदी हैं अगर बस से उतरकर नीचे किसी दुकान से खरीदते तो पाँच रूपये की चार मिलतीं।"
#स्मार्टनेस।
तेज रफ़्तार चलती हुई बस अचानक एक जगह ब्रेकों की चीत्कार सी करती हुई रुकी और बस के अगले गेट से एक बुजुर्गवार के साथ एक कतली बेचने वाले ने भी एक टोकरी भर कतली लेकर बस में प्रवेश किया और जोर-जोर से आवाज लगाने लगा....."20 रूपये की दो कतली, 20 रूपये की दो कतली, बेहद मीठी, यहाँ की मशहूर...मेवाओं से भरपूर...केवल 20 रूपये की दो कतली।"
तभी पिछले गेट से दूसरे कतली वाले ने प्रवेश किया और अपनी आदतानुसार चिल्लाया-- "20 रूपये की दो कतली...20 रूपये की दो कतली...।"
पहले वाले ने उसे तुरंत टोका और कहा, "जब अभी तेरे मेरे बीच में फैसला हुआ है कि एक बस तेरी और एक बस मेरी तो तू इस बस में क्यों आया है? उस हिसाब से तो ये बस मेरी है, यहाँ से उतर और मुझे बेचने दे।"
"वो फैसला रद्द। इसलिए हर बस मेरी और हर बस तेरी। तू बेच और मैं भी बेचूंगा।" दूसरे वाले ने बिना किसी दबाब के अपनी बात कही।
"फैसला अपनी जगह है, सबके सामने हुआ है इसलिए तुझे तो बेचने ही नहीं दूंगा।" इतना कहकर पहले कतली वाले ने आवाज लगाना शुरू किया..."पंद्रह रूपये की दो कतली, पंद्रह रूपये की दो कतली।"
दूसरे वाले ने भी उसकी देखा देखी आवाज लगायी "10 रूपये की दो कतली, दस रुपये की दो कतली..."
बस में बैठी सवारियाँ इस लड़ाई का लुत्फ़ उठाने लगीं।
तभी पहले वाले ने कहा, "भले ही आज कितना भी नुकसान हो जाये, तुझे नहीं बेचने दूँगा।" इतना कहकर उसने आवाज लगायी "आठ रूपये की दो कतली, आठ रूपये की दो कतली.."
दूसरे वाले ने भी कहा, "बेटा, मैं भी नुकसान झेल लूँगा पर तेरा नुकसान करा कर मानूँगा।" इतना कहकर वो चिल्लाने लगा ..."पाँच रूपये की दो कतली, पाँच रूपये की दो कतली।"
बस में बैठी सवारियों के पर्स खुलने लगे और पहले वाला दूसरे को गालियाँ देते हुए बस से उतर गया।
आप अगर सोच रहे हो कि मैं आपको बिजनेस में कॉम्पटीशन से होने वाले नुकसान के बारे में सिखाने के लिए कोई कहानी सुना रहा हूँ तो आप गलत सोच रहे हैं। आगे पढ़िए और खुद जांचिए।
तभी कतली खाकर चुके एक लड़के ने अपने साथ बैठे बुजुर्ग से कहा, "बाबूजी आपने क्यों नहीं खरीदी? उन दोनों की लड़ाई में सबका फायदा हो गया।"
बुजुर्ग ने जवाब दिया, "मियाँ वो दोनों कतली बेचने वाले सगे भाई हैं और ये उनके कतली बेचने का अलग तरीका है। जो कतली तुमने पाँच रूपये की दो खरीदी हैं अगर बस से उतरकर नीचे किसी दुकान से खरीदते तो पाँच रूपये की चार मिलतीं।"
#स्मार्टनेस।
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