Saturday, 15 July 2017

अगर आप लोग महाभारत को गौर से पढ़ेंगे तो पाएंगे कि ये किताब आपको जीने का तरीका सिखाती हुयी महसूस होगी बशर्ते आप इसे ध्यान से पढ़ें। इस ग्रन्थ के हर पन्ने पर आपको वो ज्ञान मिल सकता है जिसकी आपने कभी उम्मीद न की होगी बशर्ते आपकी दृष्टि सूक्ष्म होनी चाहिए और सोच विस्तृत।

युद्ध, धर्म परायणता, दुविधाएँ, अंदरूनी कलह के अलावा ये ग्रन्थ आपको रोजमर्रा की जिंदगी का भी ज्ञान दे सकता है लेकिन ध्यान से पढ़ना पड़ेगा।

आपको रोज़ कोई न कोई सलाह दे ही देता होगा कि अपने अंदर की आवाज सुनो और आप हो कि उसे कान पर से मक्खी की तरह उड़ा दिया करते हो। अगर ऐसा कर रहे हो तो आगे की पोस्ट आपके लिए ही है।

अगर आप महाभारत की तुलना खुद से करेंगे तो पाएंगे कि पाँच पांडव वास्तव में आपकी पाँच इन्द्रियां हैं जिनका सामना ऱोज सौ तरह की कौरव रुपी समस्याओं से होता है। जिनके सामने आप कभी जीतते हैं कभी हारते हैं। अब सोचो कि आपके शरीर रूपी रथ को श्रीकृष्ण चला रहे हैं जो कि और कोई नहीं आपकी आत्मा है। अब आपको चाहिए कि आप अपनी सारी समस्याओं के हल के लिए अपनी अन्तरआत्मा की आवाज सुनें, जो कि साफ़ तौर पर श्री कृष्ण की आवाज है जो कि आपको हर वक्त और हर परिस्थिति में सही निर्णय देगी। आपकी सारी दुविधाओं का हल श्रीकृष्ण मतलब आपकी आत्मा की आवाज है।

आप सोच रहे होंगे कि महाभारत में कर्ण भी एक खास किरदार था और उसके बारे में तो कुछ बताया ही नहीं।
खैर अभी मेरी पोस्ट खत्म नहीं हुई, कर्ण को आप कौरवों रुपी समस्याओं की तरह अपना भाई मान सकते हो। मतलब उसको आप अपनी इच्छा, वासना, या चाहत कह सकते हो। ये और कुछ नहीं बस आपकी इंद्रियों को संकुचित करने के लिए एक कारण भर है। जो कि है तो आपका ही हिस्सा लेकिन आपके दुश्मनों में शुमार है। जैसे कर्ण को महाभारत में मारने के लिए धोखे का सहारा लिया गया था ऐसे ही आप अपनी अंदरूनी आवाज की सुनकर, और थोड़ी धोखाधड़ी करके अपनी कर्ण रुपी चाहतों पर विजय पा सकते हो।

तो कुल मिलाकर सार ये है कि अपनी अंदरूनी आवाज को सुनो और चाहतों और रकीबों को दोयम दर्जे पर रखो। तरक्की आपके कदम चूमेगी।

पुनश्चहः- "महाभारत, गीता, और रामायण आपके घर में लाल कपड़ों में लिपटी रखी होंगी, उनको निकालो, उन पर जमी धूल साफ़ करो और एक पन्ना ही पढ़ो लेकिन ऱोज पढ़ो।

शुभ रात्रि।

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