#स्मार्टनेस।
ऱोज भले ही वो दोनों भाई और उनका परिवार अलग अलग खाना खाते थे लेकिन बड़े भाई की दस साल की लड़की ने उस रविवार अपने मम्मी और पापा से बिना पूछे अपने चाचा-चाची और दादा-दादी को फोन करके कह दिया था कि आज रात का खाना वो अपने घर पर सबके साथ खाना चाहती है और क्योंकि उसके घर पर उसके मम्मी-पापा को उनके स्मार्टफोन से फुर्सत नहीं मिलती है तो वो सबके साथ खेलना चाहती है और उन सबको कुछ सिखाना चाहती है। पूरा परिवार काफी दिन से साथ भी नहीं बैठा था और बच्ची के अनुरोध को कोई ठुकरा भी नहीं पाया।
शाम सात बजे पूरा परिवार साथ बैठा था। दादा, दादी, चाचा, चाची, मम्मी, पापा और वो खुद। सबने आपस में बातें कीं और माहौल बेहद खुशनुमा था।
चाची और मम्मी ने अपनी तरफ से बेहद लजीज खाना बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। रात नौ बजे जब सब लोग उस लज़ीज खाने की तारीफ करते नहीं थक रहे थे तब उस दस साल की लड़की ने कहा कि "अब मैं अपना खेल शुरू करने वाली हूँ, इस खेल में जो जीतेगा, मैं दो दिन उसके ही साथ रहूंगी। समय रात दस बजे तक।"
दादा-दादी और चाचा-चाची जीतने के लिए कुछ भी हारने को तैयार थे।
वो लड़की तुरंत अंदर गयी और छः ड्राइंग के पेपर लायी और हरेक के हाथ में एक दे दिया, दो पेंसिल और दो इरेजर को उसने छः भागों में तोड़ा और उन सबके सामने रख दिया, फिर उसने अपने क्रेयन कलर और स्केच कलर वहाँ रख दिए और कहा "अब आपको इस कागज पर एक फूल का चित्र बनाना है और मैं उस चित्र की सुंदरता देखकर आपको आपका भविष्य बता दूँगी। बच्ची की फरमाइश पर हरेक ने अपना भविष्य जानने को बेहद खूबसूरत फूल का सृजन किया और उसमें बेहतरीन रंग भरे।
रात दस बजे तक सारे चित्र तैयार थे और सब के सब उस दस साल की न्यायाधीश के पास पहुँच चुके थे।
उन सबको चेक करके उसने जो परिणाम घोषित किया तो सब बेहोश होने से बाल-बाल बचे थे। उसने परिणाम घोषित किया कि "अब मेरे दस में से नौ नम्बर तो पक्के हैं। आज मुझे पूरा दिन दो कार्टून फिल्में देखनी थीं और ड्राइंग के वीकली होमवर्क में छः फूल भी कलर करके बनाने थे जो आप सबने बना दिए।"
स्मार्ट फोन रखने से कोई स्मार्ट नहीं हो जाता। स्मार्टनैस प्राकृतिक उपहार है जो हर किसी को नहीं मिलता।
शुभरात्रि।
©सुनीत शर्मा
ऱोज भले ही वो दोनों भाई और उनका परिवार अलग अलग खाना खाते थे लेकिन बड़े भाई की दस साल की लड़की ने उस रविवार अपने मम्मी और पापा से बिना पूछे अपने चाचा-चाची और दादा-दादी को फोन करके कह दिया था कि आज रात का खाना वो अपने घर पर सबके साथ खाना चाहती है और क्योंकि उसके घर पर उसके मम्मी-पापा को उनके स्मार्टफोन से फुर्सत नहीं मिलती है तो वो सबके साथ खेलना चाहती है और उन सबको कुछ सिखाना चाहती है। पूरा परिवार काफी दिन से साथ भी नहीं बैठा था और बच्ची के अनुरोध को कोई ठुकरा भी नहीं पाया।
शाम सात बजे पूरा परिवार साथ बैठा था। दादा, दादी, चाचा, चाची, मम्मी, पापा और वो खुद। सबने आपस में बातें कीं और माहौल बेहद खुशनुमा था।
चाची और मम्मी ने अपनी तरफ से बेहद लजीज खाना बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। रात नौ बजे जब सब लोग उस लज़ीज खाने की तारीफ करते नहीं थक रहे थे तब उस दस साल की लड़की ने कहा कि "अब मैं अपना खेल शुरू करने वाली हूँ, इस खेल में जो जीतेगा, मैं दो दिन उसके ही साथ रहूंगी। समय रात दस बजे तक।"
दादा-दादी और चाचा-चाची जीतने के लिए कुछ भी हारने को तैयार थे।
वो लड़की तुरंत अंदर गयी और छः ड्राइंग के पेपर लायी और हरेक के हाथ में एक दे दिया, दो पेंसिल और दो इरेजर को उसने छः भागों में तोड़ा और उन सबके सामने रख दिया, फिर उसने अपने क्रेयन कलर और स्केच कलर वहाँ रख दिए और कहा "अब आपको इस कागज पर एक फूल का चित्र बनाना है और मैं उस चित्र की सुंदरता देखकर आपको आपका भविष्य बता दूँगी। बच्ची की फरमाइश पर हरेक ने अपना भविष्य जानने को बेहद खूबसूरत फूल का सृजन किया और उसमें बेहतरीन रंग भरे।
रात दस बजे तक सारे चित्र तैयार थे और सब के सब उस दस साल की न्यायाधीश के पास पहुँच चुके थे।
उन सबको चेक करके उसने जो परिणाम घोषित किया तो सब बेहोश होने से बाल-बाल बचे थे। उसने परिणाम घोषित किया कि "अब मेरे दस में से नौ नम्बर तो पक्के हैं। आज मुझे पूरा दिन दो कार्टून फिल्में देखनी थीं और ड्राइंग के वीकली होमवर्क में छः फूल भी कलर करके बनाने थे जो आप सबने बना दिए।"
स्मार्ट फोन रखने से कोई स्मार्ट नहीं हो जाता। स्मार्टनैस प्राकृतिक उपहार है जो हर किसी को नहीं मिलता।
शुभरात्रि।
©सुनीत शर्मा
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