Saturday, 15 July 2017

#ट्रिक 2

पुराने समय की बात है जब मिल्कियत में साइकिल होना एक घमंड की बात होती थी, एक तो उस ज़माने में सादा जीवन व्यतीत करने वाले इंसान होते थे और दूसरा इंसान की जिंदगी में दिखावा नहीं था। तो उस ज़माने में एक बहुत ही चतुर व्यक्ति ने साइकिल खरीद ली और अपने पड़ोसियों पर अपना रौब ग़ालिब करने लगा लेकिन उसे हर समय एक चिंता सताए रहती थी कि कहीं उसकी साइकिल को कोई चुरा न ले।

तो जनाब ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए उसने पाँच ताले ख़रीदे और वो जहाँ कहीं भी जाता अपनी साइकिल को खड़ा करके उसमें पाँचों ताले लगा कर जाता। पांचों ताले लगाना उसकी आदत में पूरी तरह शुमार हो चुका था; ऐसे ही एक दिन वो अपनी साइकिल पर शान से सवार होकर सवेरे सवेरे हाट पहुँचा। उसकी पत्नी वहाँ कुछ देर बाद महिलाओं के एक समूह के साथ पहुंचीं। जो भी खरीददारी करनी थी उसे करके उस आदमी ने अपनी पत्नी से विदा ली और साइकिल के पास पहुंचकर उसके पाँचों ताले खोलकर चलने को हुआ तो उसे एहसास हुआ कि साइकिल में एक और ताला लगा हुआ है। उसे अपनी पत्नी की बुद्धिमानी पर ताज़्ज़ुब हुआ और वो सीधा उसके पास पहुँचा जो कि कुछ दूर अपने समूह के साथ गपशप में मशगूल थी। जब आदमी ने उससे चाबी की माँग की तो उसकी पत्नी ने कहा कौन सी चाबी? आदमी ने कहा कि जो छटा ताला तुमने लगाया है उसकी चाबी। अब उसकी पत्नी ने उसे बताया कि उसने तो साइकिल में कोई ताला नहीं लगाया। अब आदमी के दिमाग में कोई कीढा कुलबुलाया और वो तुरंत दौड़कर अपनी साइकिल के पास पहुँचा और देखा कि साइकिल वहाँ से नदारद थी।  साइकिल चोरी हो चुकी थी। छटा ताला चोर लगा कर गया था।

कल की पोस्ट में मैंने आपको बताया था कि सामने वाले को उसी की योजना से मारना चाहिए तो आप इसको कल वाली पोस्ट का प्रैक्टिकल समझ लो।

चोर ने चतुर को उसीके हथियार और उसकी योजना से मारा था।

बादबाकी बड़े बूढ़े कह कर गए हैं कि हर सेर को सवा सेर मौजूद है तो गलत थोड़े ही कह गए हैं।

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