#रूपा।
नाम सुना-सुना सा लग रहा होगा न कुछ-कुछ, आखिर हो भी क्यों न? एक तो शायद आपके घर के पास ही रहती होगी या मोहल्ले की एक दो का नामकरण आपने खुद ही रूपा कर दिया होगा।
खैर मज़ाक की बात थी ये तो। असल बात अब शुरू होती है। रूपा का मतलब जानते हैं आप? नहीं? कोई बात नहीं तो।
रूपा शब्द का उदगम हमारी दुर्लभ भाषा 'संस्कृत' के शब्द 'रूप' व 'रूप्याह' में निहित है व इसका शाब्दिक अर्थ होता है 'चाँदी' अथवा कच्ची चाँदी। भारत में बंगाल में आज भी चाँदी को रूपा बोला जाता है। शेरशाह सूरी ने जब भारत में मुद्रा का प्रसार किया था तो उसने तांबे, सोने और चाँदी के सिक्के चलवाये थे। तांबे के सिक्कों को 'दाम अथवा दमड़ी' कहा जाता था, सोने के सिक्कों को 'मोहर अथवा अशर्फी' बोला जाता था तथा चाँदी के सिक्कों को 'रुपिया' बोला जाने लगा और यही रुपिया आजकल का रुपया है।
शब्दों के जनन व अर्थ के पीछे भी कभी-कभार बेहद मजेदार वजहें निकल आती हैं।
ये था हमारी मुद्रा का संक्षिप्त इतिहास, बादबाकी विस्तृत इतिहास जानने के लिए किताबें तो हैं ही।
नाम सुना-सुना सा लग रहा होगा न कुछ-कुछ, आखिर हो भी क्यों न? एक तो शायद आपके घर के पास ही रहती होगी या मोहल्ले की एक दो का नामकरण आपने खुद ही रूपा कर दिया होगा।
खैर मज़ाक की बात थी ये तो। असल बात अब शुरू होती है। रूपा का मतलब जानते हैं आप? नहीं? कोई बात नहीं तो।
रूपा शब्द का उदगम हमारी दुर्लभ भाषा 'संस्कृत' के शब्द 'रूप' व 'रूप्याह' में निहित है व इसका शाब्दिक अर्थ होता है 'चाँदी' अथवा कच्ची चाँदी। भारत में बंगाल में आज भी चाँदी को रूपा बोला जाता है। शेरशाह सूरी ने जब भारत में मुद्रा का प्रसार किया था तो उसने तांबे, सोने और चाँदी के सिक्के चलवाये थे। तांबे के सिक्कों को 'दाम अथवा दमड़ी' कहा जाता था, सोने के सिक्कों को 'मोहर अथवा अशर्फी' बोला जाता था तथा चाँदी के सिक्कों को 'रुपिया' बोला जाने लगा और यही रुपिया आजकल का रुपया है।
शब्दों के जनन व अर्थ के पीछे भी कभी-कभार बेहद मजेदार वजहें निकल आती हैं।
ये था हमारी मुद्रा का संक्षिप्त इतिहास, बादबाकी विस्तृत इतिहास जानने के लिए किताबें तो हैं ही।
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