Sunday, 9 October 2016

#देशभक्ति,मैंऔरआप।


मैं आज सुबह विद्यालय जाने के लिए सही समय पर ही घर से निकला था। लेकिन मेरे घर के नजदीक ही मौजूद नगर प्रसिद्ध श्री चामुंडा माता के मंदिर पर नवरात्रि के उपलक्ष में उमड़ने वाली भीड़ के कारण सुबह 7:40 पर ही तमाम उल्टी-सीधी खड़ी स्कूटी, बाइक्स और टिर्रियों(E-Rickshaw) की वजह से जो ट्रैफिक जाम लगा तो मुझे विद्यालय जाने में 15 मिनट की देरी हो गयी। खैर वहाँ जाकर सुन ली जो सुननी थी। विद्यालय से लौटकर आ रहा था तो चामड़ गेट चौराहे पर फिर जाम मिला और 20 मिनट वहाँ बर्बाद हो गईं। जो मुझको 2:30 पर घर पहुँचना था मैं 2:50 पर पहुँच पाया। 4 बजे ट्यूशन था लेकिन रास्ते में फिर एक जाम मिला और मैं वहाँ 4:10 पर पहुँच पाया। आज पूरा दिन जाम के झाम में फँसा हुआ मैं काफी कुछ सोचता रहा तो बचपन में पढ़ी हुई या कहीं सुनी हुयी एक कहानी याद आ गयी पहले उसे पढ़ लो।

समुद्र पर लँका जाने के लिए रामसेतु बनाने का कार्य चल रहा था। भगवान राम को काफी देर तक एक ही दिशा में निहारते हुए देख लक्ष्मण जी ने पूछा, "भैया आप इतनी देर से उधर क्या देख रहें हैं?"
भगवान राम ने एक जगह इशारा करते हुए कहा , "वो देखो लक्ष्मण एक गिलहरी बार–बार समुद्र के किनारे जाती है और रेत पर लोटपोट होकर रेत को अपने शरीर पर चिपका लेती है। जब रेत उसके शरीर पर चिपक जाता है तो फिर वह सेतु पर जाकर अपना सारा रेत सेतु पर झाड़ आती है। वह काफी देर से यही कार्य कर रही है।"
लक्ष्मणजी बोले, "प्रभु वह नन्ही गिलहरी समुद्र में क्रीड़ा का आनंद ले रही है और कुछ नहीं।"
भगवान राम ने कहा, "नहीं लक्ष्मण, तुम उस गिलहरी के भावों को समझने का प्रयास नहीं कर रहे हो। चलो आओ उस गिलहरी से ही पूछ लेते हैं की वह क्या कर रही है?"
इस प्रकार दोनों भाई उस गिलहरी के निकट गए। भगवान राम ने गिलहरी से पूछा, "तुम क्या कर रही हो?"
गिलहरी ने जवाब दिया, "कुछ भी नहीं प्रभु बस इस पुण्य कार्य में थोड़ा बहुत योगदान दे रही हूँ।"
भगवान राम को उत्तर देकर गिलहरी फिर से अपने कार्य के लिए जाने लगी, तो भगवान राम उसे टोकते हुए बोले, "तुम्हारे रेत के कुछ कण डालने से क्या होगा?"
गिलहरी ने उत्तर दिया, "प्रभु आप सत्य कह रहे हैं, मैं सृष्टि की इतनी लघु प्राणी होने के कारण इस महान कार्य हेतु कर भी क्या सकती हूँ? मेरे कार्य का मूल्यांकन भी क्या होगा? प्रभु, मैं यह कार्य किसी आकांक्षा से नहीं कर रही, यह कार्य तो राष्ट्र कार्य है। राष्ट्र कार्य केवल एक व्यक्ति अथवा वर्ग का नहीं अपितु योग्यतानुसार सम्पूर्ण समाज और सम्पूर्ण देशवासियों का होता है। जो राष्ट्रहित हेतु जितना कार्य कर सके उसे नि:स्वार्थ भाव से राष्ट्रहित हेतु उतना कार्य करना चाहिए। मेरा यह कार्य आत्मसंतुष्टि के लिए है प्रभु। हाँ, मुझे इस बात का खेद अवश्य है कि मैं नल, नील और अंगद जैसे सामर्थ्यवान एवं शक्तिशाली प्राणियों कि भाँति सहयोग नहीं कर पा रही।"

भगवान राम गिलहरी की बात सुनकर भाव-विभोर हो उठे और भगवान राम ने उस छोटी सी गिलहरी को अपनी हथेली पर बैठा लिया और उसके शरीर पर प्यार से हाथ फेरने लगे। कहते हैं कि भगवान राम द्वारा हाथ फिराने से ही गिलहरी की कमर पर सफ़ेद रेखाएं पड़ीं थीं जो आज तक मौजूद हैं।

पढ़ ली, तो अब लौट कर मुद्दे पर आते हैं। जाम लगने का कारण हम लोगों की ही गलती होती है जैसे कि जल्दबाज़ी की वजह से एक साइड को ब्लॉक कर देना, अपनी बाइक पर बैठे दो मित्रों या कार में बैठे 4 मित्रों की ताकत के कोरे घमण्ड में अपनी कार या बाइक को गलत साइड में निकालने के चक्कर में रास्ता ब्लॉक कर देना। अपनी बाइक या कार को कहीं भी खड़ी कर देना।
क्या कभी सोचा है कि 15 मिनट का जाम और 200 गाड़ियां फँसी हों तो औसतन 15 लीटर डीज़ल और पेट्रोल धुँआ हो जाता है। किसकी जेब से गया? आपकी और मेरी। रुपया किसका गया? आपका और मेरा। समय किसका बर्बाद हुआ? आपका और मेरा।

(1 घंटे का जाम और 2000 गाड़ियां? पेट्रोल और डीजल कितना फुंका खामखा? खुद हिसाब लगा लेना। मेरे शहर के और मेरे घर के नजदीक चौराहे पर औसतन दिन में तीन बार जाम लग ही जाता है और जाम भी छोटा-मोटा नहीं ऐसा कि वहां आप किसी से अपनी अपॉइंटमेंट फिक्स कर सकते हो।)

और सबसे बड़ा प्रश्न कि पेट्रोल और डीज़ल किसका गया? न जी हमारा नहीं गया, हमारे तो फिलहाल रूपये जा रहे हैं। ये जो ट्रैफिक जाम में पेट्रोल और डीज़ल आप और मैं खामखा फूँक रहे हैं न, ये मैं और आप आपकी और मेरी अगली पीढ़ी के हिस्से का फूँक रहे हैं। देशभक्ति का मतलब केवल चीन के माल का बहिष्ष्कार करना नहीं है, न ही बॉर्डर पर लड़ना, न ही **स्तान को गाली देना।

खैर न ही मैं नल, नील और अंगद जैसा सामर्थ्यवान और शक्तिशाली। मैं भी गिलहरी जैसा तुच्छ हूँ लेकिन मैं राष्ट्रहित में कभी भी जाम लगवाने का कारण नहीं बनता।

आप से भी गुजारिश है क़ि सड़क के नियमों का पालन करो, अपने लिए नहीं राष्ट्रहित के लिए।
जाम लगवाने का कारण न बनो कृपया।
अगर आप बाइक पर तीन कद्दावर हैं या कार में चार कद्दावर हैं तो खुद निकलने की कोशिश करने की वजाय जाम खुलवाकर जाएं, इससे देश को पेट्रोलियम ज्यादा लेने के लिए मुस्लिम देशों को हाथ नहीं पसारना पड़ेगा।

नल, नील और अंगद न बन पाए तो क्या गिलहरी तो बन ही सकते हैं न राष्ट्रहित के लिए।

बादबाकी इतना छोटा सा काम करना समझ गए तो खुद को छोटा मोदी कह सकते हो।

Like करो या न करो, comment करो या न करो।

लेकिन शेयर कर देना।


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