Sunday, 9 October 2016

#Spellingmiskate.

गलती कभी की नहीं जाती बस हो जाती है। गलती हरेक से होती है ये भी कटु सत्य है और इन गलतियों सबसे आम गलती होती है स्पेलिंग लिखने में। ये इतनी कॉमन गलती है कि बस चुपचाप हो जाती है और पता भी नहीं चलती। इस स्पेलिंग मिस्टेक से शायद ही कोई छात्र और पेशेवर अछूता रहा हो। मैं खुद एक अध्यापक हूँ लेकिन मुझसे भी हो जातीं हैं। एक तो अभी कर चुका हूँ। हैशटैग में ही मिस्टेक की स्पेलिंग लिखने में मिस्टेक कर दी है। हम लोगों के द्वारा स्पेलिंग मिस्टेक होने का सबसे बड़ा कारण हमारी मातृभाषा का अंग्रेजी न होना है। तो क्या इसका मतलब ये निकाला जाए कि जिनकी मातृभाषा अंग्रेजी है वो कभी स्पेलिंग मिस्टेक नहीं करते होंगे? करते हैं जनाब करते हैं, अंग्रेज भी अंग्रेजी लिखने में स्पेलिंग मिस्टेक करते हैं और सबूत आज दुनिया के तमाम लोगों की जुबान पर है। जब सब लोगों की जबान पर है, मतलब आज भी सब इसका उच्चारण सही करते है लेकिन जब लिखते हैं तो वो वास्तव में स्पेलिंग मिस्टेक होती है, तो मेरी नजर में ये दुनिया की सबसे बड़ी स्पेलिंग मिस्टेक है। आइये जानते हैं कैसे?

15 सितंबर सन 1997 को स्टेनफोर्ड, अमेरिका में दो पीएचडी कर रहे नवयुवक, उनमें एक 24 साल का और दूसरा 23 साल का था, बैठ कर अपने पिछले एक साल से चल रहे प्रोजेक्ट BACKRUB का नाम बदलना चाह रहे थे और उसे इन्टरनेट पर पब्लिश करना चाह रहे थे।

'लैरी' डिक्शनरी पर था और 'ब्रिन' इन्टरनेट युक्त एक कंप्यूटर पर। उनको एक ऐसे शब्द की तलाश थी जो लाख, करोड़, अरब से भी कहीं ज्यादा हो। उनकी भाषा में कहें तो जो मिलियन, बिलियन और ट्रिलियन से भी कहीं ज्यादा हो। काफी देर तक खोजने के बाद लैरी को एक शब्द मिला जिसका मतलब था वो संख्या जहाँ 1 के बाद 100 जीरो आती थीं (1.0 x 10^100).

लैरी ने तुरंत ब्रिन को चीख कर बताया क़ि हमारी कम्पनी का नया नाम मिल गया। ब्रिन ने भी तुरंत उत्तेजित होकर पूछा कि क्या?

लैरी ने नाम उच्चारित किया गूगल (GOOGOL) लेकिन उधर जो ब्रिन बैठा था वो जल्दबाज था और उसने बिना कन्फर्म किये स्पेलिंग मिस्टेक कर दी। उसने डोमेन नेम में लिखा google।

स्पेलिंग गलत थी, न किसी किताब में थी न किसी शब्दकोष में। तो तुरंत ही ये डोमेन नेम उपलब्ध हो गया उन दोनों के लिए। 'ब्रिन' ने तुरंत ही बिना स्पेलिंग जांचे उसको फाइनल कर दिया और उनका प्रोजेक्ट इंटरनेट पर आ गया। इसके तुरन्त बाद उन्होंने इस नाम से कम्पनी को शुरू किया और आज वो कम्पनी हर किसी की पहली प्राथमिकता है।

खैर लैरी को ठीक दो साल बाद पता लगा था कि स्पेलिंग मिस्टेक हो गयी है लेकिन तब तक ये नई स्पेलिंग बन चुकी थी। 1999 में गूगल तरक्की कर रही थी और 2000 से 2001 तक ये कम्पनी सिरमौर बनने की राह पर थी और बन भी चुकी थी।

एक गलती भी इतिहास के हिस्सा बन सकती है लेकिन ऐसा विरलों के साथ होता है।

बादबाकी कल भी कहे थे हम कि डिक्शनरी पर से धूल हटा लो तो वो भी सही कहे थे।

पढ़ने के लिए धन्यवाद।
शेयर करने के लिए दुगना धन्यवाद।

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