Saturday, 15 July 2017

ज्ञान के मामले में मेरा मानना है कि वो अगर आपके पास है तो उसे बाँट दो ताकि आगे आने वाली पीढ़ी उससे फायदा उठा सके। बहुत पहले सुनी हुयी एक कहानी याद आ गयी तो चलो आज आपको सुनाता हूँ।

एक कौवा बहुत दुखी था और बैठा बैठा कोयल की मधुर आवाज को सुन रहा था और सोच रहा था कि ये कोयल कितनी प्रसन्न है, इसकी आवाज कितनी मीठी है और एक तरफ मैं हूँ जिसकी आवाज कितनी कर्कश है! दुःखी कौवा कोयल के पास पहुँचा व उससे बोला, "बहन तुम दुनिया की सबसे प्रसन्न पंछी हो, तुम्हारी आवाज कितनी मधुर है।"  तिस पर कोयल ने जवाब दिया, "नहीं भाई, मैं प्रसन्न नहीं हूँ। मुझसे ज्यादा प्रसन्न तो वो हंस है देखो वो कितना सफ़ेद है और मैं कितनी काली।"

कौवे ने जब हंस को देखा तो उसके सफ़ेद रंग को देखकर उसे ईर्ष्या हुई और वो तुरंत हंस के पास पहुँचा और उससे बोला, "भाई हंस, तुम्हारा रंग कितना सफ़ेद है, तुम निश्चित ही इस दुनिया के सबसे प्रसन्न पंछी हो।" उसकी बात सुनकर हंस हँसा और बोला, "भाई कौवे, मैं कहाँ प्रसन्न रहता हूँ! मेरे पास तो केवल एक सफ़ेद ही रंग है जबकि उस तोते को देखो, वो कितने चटकीले हरे और लाल रंग में रंगा हुआ है। मुझसे ज्यादा प्रसन्न तो वो तोता है।"

कौवे ने हंस की बात को सही मानकर तोते के पास उड़ान भरी और कहा, "तोता भाई, तुम्हारा रंग कितना शानदार है! तुम मुझे दुनिया के सबसे प्रसन्न पंछी महसूस होते हो।" जवाब में तोते ने कहा," भाई कौवे, मैं और प्रसन्न!  नहीं, भाई नहीं। मैंने मोर को देखा था और पाया कि मेरे रंग मोर के चटकीले और सुन्दर रंगों के सामने कुछ भी नहीं है। सबसे प्रसन्न पंछी मोर है।"

अब कौवे ने मोर को ढूंढना शुरू किया और उसे चिड़ियाघर के पिंजरे में बंद देखा। सैंकड़ों लोग उस मोर की सुंदरता को देखकर आनंदित हो रहे थे, उसके फोटो खींच रहे थे और जब आखिरकार  जब सब लोग वहाँ से चले गए तो कौवा तुरंत मोर के पास पहुँचा और बोला, "भाई तुम बहुत भाग्यशाली हो, कितने सारे लोग तुमको दूर-दूर से देखने आते हैं और एक मैं हूँ जिसे देखकर लोग हुर्र-हुर्र करके उड़ा देते हैं। तुम तो बहुत प्रसन्न होते होंगे।" जवाब में मोर ने कहा, "भाई, मेरी सुंदरता मेरे लिए अभिशाप बन गयी है, इसी सुंदरता की वजह से मैं यहाँ क़ैद हूँ। भला क़ैद में भी कोई प्रसन्न रह सकता है। यहाँ मैंने दुनिया के तमाम पशु-पंछियों को क़ैद देखा है सिवाय एक कौवे के। असली प्रसन्न मैं नहीं बल्कि तुम हो।"

बात कौवे की समझ में आ चुकी थी।

देखा जाए तो हम इंसानों के साथ भी अक्सर यही होता है, हम हमारे पास उपलब्ध वस्तुओं या व्यक्तियों की वजह से खुश रहने की बजाय दूसरे व्यक्तियों के पास उपलब्ध वस्तुओं को देखकर ज्यादा दुखी रहते हैं। हम अपने पास मौजूद वस्तुओं की तुलना दूसरों से करते है। याद रखिए जो दूसरों के पास है वो जरूरी नहीं की आपके पास भी हो और जो आपके पास है वो जरूरी नहीं कि दूसरों के पास भी होगा। जिस दिन आपने अपने पास उपलब्ध संसाधनों से संतोष करना सीख लिया तो आप पाएंगे कि दुनिया में आपसे ज्यादा प्रसन्न और भाग्यशाली कोई नहीं है।

कहानी में मोर की बात कौवे की समझ में आ गयी थी। अब मेरी बात आपकी समझ में आयी या नहीं ये आप पर निर्भर करता है। बादबाकी बड़े-बूढ़े कह गए हैं कि संतोषी सदा सुखी, तो सही ही कह गए हैं।

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